उत्तरकाशी, 16 जुलाई। हरेला पर्व के उपलक्ष में सौम्यकाशी म्यूजिक क्लासेस द्वारा गुरुवार को प्रातः 11:00 बजे हरेला विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती शिवांगी चंदेल, सहायक अध्यापिका, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीजीआईसी), उत्तरकाशी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के महत्व, उसके संरक्षण की आवश्यकता तथा उत्तराखंड के लोगों के प्रकृति से जुड़े अटूट संबंध के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, संस्कृति और जिम्मेदारी का प्रतीक है।


विशिष्ट अतिथि श्री विजय प्रकाश भट्ट ने विद्यार्थियों को अपना आशीर्वाद देते हुए हरेला पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यालयी बच्चों को कम उम्र से ही पर्यावरण संरक्षण का महत्व बताना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे भविष्य में प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।


इस अवसर पर स्वामी घनश्यामानंद विद्यालय के प्रधानाचार्य भी उपस्थित रहे। उन्होंने सौम्यकाशी म्यूजिक क्लासेस की इस पहल की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को ऐसे रचनात्मक एवं जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम के दौरान श्रीमती नीतू गुम्बर एवं श्रीमती अनीशा भी उपस्थित रहीं। उन्होंने पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा प्रतियोगिता के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए “हरेला” विषय पर आकर्षक एवं संदेशपूर्ण चित्र बनाए। प्रतिभागियों की रचनात्मकता ने प्रकृति संरक्षण, हरियाली और पर्यावरण संतुलन का प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किया

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सौम्यकाशी म्यूजिक क्लासेस के संस्थापक एवं संचालक श्री धनंजय ने सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों तथा कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले जिला प्रशासन के अधिकारियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन का संदेश देने वाला जनपर्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, पर्यावरण की सुरक्षा करने तथा प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। आयोजकों ने भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।